शिव शंकर भोलेनाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो,

मत रोग बुढ़ापे में दीजो, मत रोग बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

बेटा देना तो ऐसा देना,

जामें श्रवण जैसा ज्ञान मत रोग बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

बहू देना तो ऐसी देना,

जामें तुलसी जैसा ज्ञान मत रोक बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

बेटी देना तो ऐसी देना,

जामें मीरा जैसा ज्ञान मत रो बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

पोता देना तो ऐसा देना,

जामें कृष्ण जैसा ज्ञान मत रोग बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

पोती देना तो ऐसी देना,

जिसका देवी जैसा रूप मत रोग बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

बुढ़ापा देना तो ऐसा देना,

तेरा भजन करूं दिन रात मत रोग बुढ़ापे में दीजो,

शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ मत रोग बुढ़ापे में दीजो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।