अंगूठी कहां छोड़ी भगवान

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बता दे कर मोपे एहसान,

अंगूठी कहां छोड़े भगवान,

कहां छोड़े भगवान अंगूठी कहां छोड़े भगवान,

बता दे कर मोपे पर एहसान....

जिनकी चरणों की दासी, हरदम दर्शन की प्यासी,

उनमें बसते मेरे प्राण, अंगूठी कहां छोड़े भगवान,

बता दे कर मोपे पर एहसान....

बता दे रघुवर की कुशला फिकर में डूब रही दिन रात,

भटकते होंगे बन बन राम, अंगूठी कहां छोड़े भगवान,

बता दे कर मोपे पर एहसान....

कैसे हुई राम से न्यारी रोए रोए कह रही जनक दुलारी,

तेरी लीला अजब महान, अंगूठी कहां छोड़े श्री राम,

बता दे कर मोपे पर एहसान....

ज्ञान से लगी ज्ञान की माटी सुनके हुई आत्मा ठंडी,

सीता समझ गई सब बात, अंगूठी कहां छोड़े भगवान,

बता दे कर मोपे पर एहसान....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।