मोरुड़ा चिलेश्वर माही मीठो मीठो बोल्‍यो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोरुड़ा चिलेश्वर माही मीठो मीठो बोल्‍यो रे॥

मोरुड़ा श्याम धनी के दाय घणो आयो रे॥

मोरुड़ा हद बोल्‍यो पण बोल्‍यो रे

मोरुड़ा भक्ता के तो दाय घणो आयो रे

मोरुड़ा फागण माही मीठो मीठो बोल्‍यो रे॥

मोरुड़ा चिलेश्वर श्याम के दाय घणो आयो रे॥

मोरुड़ा हद बोल्‍यो पण बोल्‍यो रे

मोरुड़ा भक्ता के तो दाय घणो आयो रे

मोरुड़ा चिलेश्वर की अलीया गलिया में बोल्‍यो रे॥

मोरुड़ा भक्ता वाले दाय घणो आयो रे॥

मोरुड़ा हद बोल्‍यो पण बोल्‍यो रे

मोरुड़ा भक्ता के तो दाय घणो आयो रे

मोरुड़ा जात्रा की झाँकी माले बोल्‍यो रे॥

मोरुड़ा पंखड़ीया पसार मीठो बोल्‍यो रे॥

मोरुड़ा हद बोल्‍यो पण बोल्‍यो रे

मोरुड़ा भक्ता के तो दाय घणो आयो रे

दिनेश कुमावत चिलेश्वर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।