जिंदगी एक किराए का घर है

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॥ पावन पाठ ॥

जिंदगी एक किराए का घर है,

एक ना एक दिन तो जाना पड़ेगा॥

मौत जब तुझको आवाज देगी,

घर से बाहर निकलना पड़ेगा॥

रूठ जाएंगे जब तुझसे दुनिया,

गम के सांचे में ढलना पड़ेगा,

वक्त ऐसा भी आएगा नादान,

तुझको कांटों पे चलना पड़ेगा,

जिंदगी एक किराए का घर है.....

तेरे जितने भी भाई भतीजे,

तेरे साथी हैं सब जीते जीते,

अपने आंगन से उठना पड़ेगा,

अपनी चौखट से जाना पड़ेगा,

जिंदगी एक किराए का घर है.....

है अगर तुमको इंसान बनना,

मन लगाकर मेरी बात सुनना,

छोड़नी होगी हर एक बुराई,

ख्वाहिशों को कुचलना पड़ेगा,

जिंदगी एक किराए का घर है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।