शिव तो सन्यासी है गौरा कैसे निभाओगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव तो सन्यासी हैं गौरा तुम पछताओगी,

अपनी जीवन नैया कैसे पार लगाओगी॥

भोले जी के माथे पर चंदा सोना लगता है,

चंदन का तिलक गौरा तुम कैसे लगाओगी,

शिव तो सन्यासी हैं गौरा तुम पछताओगी,

अपनी जीवन नैया कैसे पार लगाओगी॥

भोले की जटाओं में गंगा सोनी लगती है,

काली काली जुल्फे गौरा तुम कैसी सजाओगी,

शिव तो सन्यासी हैं गौरा तुम पछताओगी,

अपनी जीवन नैया कैसे पार लगाओगी॥

भोले जी के गले में नागों की माला है,

फूलों की माला गौरा तुम कैसे पहनाओगी,

शिव तो सन्यासी हैं गौरा तुम पछताओगी,

अपनी जीवन नैया कैसे पार लगाओगी॥

भोले जी के हाथों में डमरू सोना लगता है,

ढोल मजीरा गौरा तुम कैसे बजवाओगी,

शिव तो सन्यासी हैं गौरा तुम पछताओगी,

अपनी जीवन नैया कैसे पार लगाओगी॥

तन बाघअंबर है अंग भवूति है,

पीला पितांबर गौरा तुम कैसे पहनाओगी,

शिव तो सन्यासी हैं गौरा तुम पछताओगी,

अपनी जीवन नैया कैसे पार लगाओगी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।