मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है....

ना मिलती अगर दी हुई दात तेरी,

तो क्या थी ज़माने में औकात मेरी,

तुम्ही ने तो जीने के काबिल किया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।

मुझे है सहारा तेरी बंदगी का,

है जिसपर गुज़ारा मेरी ज़िन्दगी का,

मिला मुझको जो कुछ तुम्ही से मिला है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।

किया कुछ ना मैंने शरमसार हूँ मैं,

तेरी रहमतो का तलबगार हूँ मैं,

दिया कुछ नही बस लिया ही लिया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।

मिला मुझको जो कुछ बदौलत तुम्हारी,

मेरा कुछ नही सब है दौलत तुम्हारी,

उसे क्या कमी जो तेरा हो लिया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।

मेरा ही नही तू सभी का है दाता,

तू ही सबको देता तू ही है खिलाता,

तेरा ही दिया मैंने खाया पिया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,

तेरा शुक्रिया है,

तेरा शुक्रिया है,

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।