पलना में रोवे री कन्हैया मेरो सांवरो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पलना में रोवे री कन्हैया मेरो सांवरो....-4

बहुत देखने आई गुजरिया,

मेरे लाल को लगा गई नजरिया,

यह चुप ना होवे री कन्हैया मेरो सांवरो,

पलना में रोवे री कन्हैया मेरो सांवरो....

गोदी में लेकर मैं पुचकारू,

लोरी सुनाऊं और कंधे से लगाऊं,

ना पलना झूले री कन्हैया मेरो सांवरो,

पलना में रोवे री कन्हैया मेरो सांवरो....

काजल का टीका मैंने लगाया,

नोन राई मैंने सब कुछ उतारा,

बड़ों रुदन मचावे री कन्हैया मेरो सांवरो,

पलना में रोवे री कन्हैया मेरो सांवरो....

दर पर आए भोले भंडारी,

लाला दरस की लगन है भारी,

कैसी लीला दिखाई दी कन्हैया मेरो सांवरो,

पलना में रोवे री कन्हैया मेरो सांवरो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।