हारे के सहारे अब तो आकार ले सम्भाल

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( सावन बिता कार्तिक बिता और बिता फागुन मास,

तरस तरस कर रह गया श्याम तेरा ये दास। )

दुःख बहुत बड़े सरकार पड़े हम हाल से हुए बेहाल,

हारे के सहारे अब तो आकार ले सम्भाल॥

लहरों का जोर भारी टूटी सी नाव है,

तू ही बता दे बाबा क्या ये इंसाफ़ है,

थाम लो अब पतवार श्याम तुम ले चल परली पार,

हारे के सहारे अब तो आकार ले सम्भाल॥

सारी दुनिया में मेरा कोई ना आसरा,

मेरा तो जो कुछ वो तू ही है सांवरा,

देर करो ना और सहा ना जाए अब ये काल,

हारे के सहारे अब तो आकार ले सम्भाल॥

पहले क्या गम कम था इस जीवन में श्याम है,

दूजा जो गम तू देता ना सुनकर श्याम है,

अब तो बाबा मोरछड़ी ले लीले पर तो चाल,

हारे के सहारे अब तो आकार ले सम्भाल॥

तेरा हर फैसला सिर माथे सरकार ये,

आये जो ना फिर समझू कमी थी पुकार में,

‘कमल’ भरोसा प्रीत ना होगी तुम संग लगी बेकार,

हारे के सहारे अब तो आकार ले सम्भाल॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।