कान्हा बिन चैन पड़े कैसे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा बिन चैन पड़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे॥

जिस जिसने तेरा नाम लिया,

आकर के कन्हैया तूने थाम लिया।

द्रौपदी ने तुम्हें पुकारा है,

तूने आकर दिया सहारा है

तेरे बिन लाज बचे कैसे,

तेरे बिन चीर बढ़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे,

कान्हा बिन चैन पड़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे॥

मीरा ने तुम्हें पुकारा है,

तूने आकर दिया सहारा है,

तेरे बिन जहर पचे कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे,

कान्हा बिन चैन पड़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे॥

नरसी ने तुम्हें पुकारा है,

तूने आकर दिया सहारा है,

तेरे बिन भात भरे कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे,

कान्हा बिन चैन पड़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे॥

प्रहलाद ने तुम्हें पुकारा है,

तूने आकर दिया सहारा है,

तेरे बिन प्राण बचे कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे,

कान्हा बिन चैन पड़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे॥

हरिश्चंद्र ने तुम्हें पुकारा है,

तूने आकर दिया सहारा है,

तेरे बिन घड़ा उचे कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे,

कान्हा बिन चैन पड़े कैसे,

दिन कट जाए रात कटे कैसे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।