प्रभु येसु का प्यार

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॥ पावन पाठ ॥

निरंकुश प्रभु येसु का प्यार सागर से भी गहरा है,

उंची है उसकी सिंहासत, उसकी शोहरत उंची है,

निरंकुश प्रभु येसु का प्यार सागर से भी गहरा है॥

पापी हूँ प्रभु मैं आया हूँ तेरे कपड़ो को छूने को,

हो जाऊंगा मै चंगा प्रभु ये विश्वास है मुझको तो,

निरंकुश प्रभु येसु का प्यार सागर से भी गहरा है॥

दुख मे कराहता मै आया हूँ तुझको लेने घर मेरे,

हो जायेगी दूर सारी बीमारी ये विश्वास है अब मुझको,

निरंकुश प्रभु येसु का प्यार सागर से भी गहरा है॥

आस लगाए मै बैठा हूं दाऊद के पुत्र दया कर दे,

देखूँगा फिर से तेरी रचना को ये विश्वास है मुझको,

निरंकुश प्रभु येसु का प्यार सागर से भी गहरा है,

सागर से भी गहरा है,

सागर से भी गहरा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।