मैं काँवर लाऊंगा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं काँवर लाऊंगा,

तेरी बाबा भोले,

मैं काँवर लाऊंगा,

तेरी बाबा भोले,

मने भी दर्शन दोगे हे त्रिपुरारी,

मैं काँवर लाऊंगा,

तेरी बाबा भोले,

मने भी दर्शन दोगे हे त्रिपुरारी,

तेरा सच्चा द्वार है द्वार है द्वार,

तेरा सच्चा द्वार है द्वार है द्वार,

तेरे दर आउंगी,

तेरा गुण गाऊंगी,

तेरे दर आउंगी,

तेरा गुण गाऊंगी,

मेरी भी सुध ले लोगे भोले भंडारी,

तेरा सच्चा द्वार है द्वार है द्वार,

तेरा सच्चा द्वार है द्वार है द्वार,

मैं काँवर लाऊंगा,

तेरी बाबा भोले,

मने भी दर्शन दोगे हे त्रिपुरारी।

बजेंगी ढफली, बजेंगी घुँघरू,

भोले के मेले में,

कही मिलेंगे सेब संतरे,

कई कोऊ खेड़े में,

शिव शम्भू की काँवर मैं तो सजा के लाऊंगी,

हरिद्वार से बम बम भोले करती आऊंगी,

भोला गंगा पार है पार है पार,

भोला गंगा पार है पार है पार,

मैं काँवर लाऊंगा,

तेरी बाबा भोले,

मने भी दर्शन दोगे हे त्रिपुरारी।

सुना है हमने यो भोले बाबा,

बड़ा दयालु है,

बिन मांगे ही सब कुछ देदे,

बड़ा कृपालु है,

सच्चे मन से जो कोई,

शिव की काँवर लावेगा,

दर्शन देगा उसे जगेश्वर,

जो गुण गावेगा,

चाहे नर या नार है नार है नार,

चाहे नर या नार है नार है नार,

मैं काँवर लाऊंगा,

तेरी बाबा भोले,

मने भी दर्शन दोगे हे त्रिपुरारी,

तेरा सच्चा द्वार है द्वार है द्वार,

तेरा सच्चा द्वार है द्वार है द्वार,

तेरे दर आउंगी,

तेरा गुण गाऊंगी,

मेरी भी सुध ले लोगे भोले भंडारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।