हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...-3

पाल पोस के बड़ी कराई,

भेज गई ससुराल, पिता पे बेटी ना राखी जाए,

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...

राजा हिमाचल में गौरा पाली,

भेज दई कैलाश, पिता पे बेटी ना राखी जाए,

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...

राजा जनक ने सीता पाली,

स्वयंबर दिया रचाए, पिता पे बेटी ना राखी जाए,

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...

मात कहे बेटी आती जाती रहीयो,

बाबुल कहे छठ मास, पिता पे बेटी ना राखी जाए,

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...

बिरन कहे बहना सावन सूने,

भावज कहे क्या काम, पिता पे बेटी ना राखी जाए,

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...

बेटी है किसी और का गहना,

जग में पुरानी रीत, पिता पे बेटी ना राखी जाए,

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।