कोई किसी का नहीं रे भजन करो

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कोई किसी का नहीं रे भजन करो,

राम भजन करो हरी का भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

यह बेटा मैंने ऐसे पाले,

पाल पोस के ब्याह कराएं,

मिल गई चतुर बहुरिया, भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

यह बाहुअल मैंने ऐसी राखी,

जैसे नैनन विच पुतरिया, भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

ये बेटी मैंने ऐसी पाली,

जैसे सोन चिरैया, भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

या बिटिया को ब्याह कराओ,

बिटिया को मिल गए सैया, भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

या बिटिया को मैंने लेने भेजा,

कहती टाइम नहीं है, भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

यह पोते मैंने ऐसे पाले,

गोद उठाए खूब खिलाए,

कहते मरती नहीं हैं, भजन करो,

कोई किसी का नहीं रे भजन करो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।