नशा चढ़या नाम दा तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

नशा चढ़या नाम दा तेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई,

जपा नाम तेरा शाम सवेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई॥

मैं ते महिमा तेरी गावा, ऐ लोका नू किंज समझावां,

कोई समझ ना आवे मेरे कि लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई,

नशा चढ़या नाम दा तेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई॥

तैनू दिल दे विच वसा के, महिमा तेरी सोणी गा के,

मुक जान चौरासी वाले गेड़े की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई,

नशा चढ़या नाम दा तेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई॥

जदो नाम दा प्याला पीता, प्रभु दी महिमा गाना सिखया,

मेरे कर दे दूर हनेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई,

नशा चढ़या नाम दा तेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई,

जपा नाम तेरा शाम सवेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई,

नशा चढ़या नाम दा तेरे की लोकी कहन्दे भंग चढ़ गई॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।