दाता जी तहानु तक तक के जीवा

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॥ पावन पाठ ॥

दाता जी तहानु तक तक के जीवा,

तक तक के जीवा प्रभु जी तहानु तक तक के जीवा,

दाता जी तहानु तक तक के जीवा॥

सुख विच शुकर मनावा ते, मैं दुःख विच अर्ज सुनावा,

हर वेले अरदास करा मैं पल पल शीश निभावा,

सुमिरन विच बीते कुल जीवन, बस एहो चाहवा,

दाता जी तहानु तक तक के जीवा.....

चन ते चकोर दे वरगा तुहाडा ते साडा नाता,

आसा हां कठ पुतली दाता जी, तुसा हो लेख भी साडा,

असा हा मूर्ख ते अज्ञानी, तुसी पूरण गयाथा,

दाता जी तहानु तक तक के जीवा.....

दुनिया दे कम कारज अंदर याद ना भुल्दी तुहाडी,

दिल दे शीशे दे विच अंदर सूरत दिसदी तुहाडी,

दास तेरे दर ते आया सुन लो ये फरियाद,

दाता जी तहानु तक तक के जीवा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।