प्रभु ख्रीस्त मेरे स्वामी मन के

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु ख्रीस्त मेरे स्वामी मन के,

तुम प्रेम मिलन को आ जाओ,

मैं भटका राही जीवन में,

तुम राह नई दिखला जाओ,

प्रभु ख्रीस्त मेरे.....

ये जीवन पग पग उजड़ा है,

और हर पग पग में अँधेरा है,

तुम ज्योति बनो मेरे मन की,

और मन में ज्योति जला जाओ,

प्रभु ख्रीस्त मेरे.....

ये जीवन कण कण बिखरा है,

और पाप का इसमें बसेरा है,

दो अपने से वरदान मुझे,

और प्रेम का राग सीखा जाओ,

प्रभु ख्रीस्त मेरे.....

सोचा ना कभी ये भी हमने,

कितने ही कष्ट सहे तुमने,

शैतान ने फसाया फंदे में,

तुम आके जरा सुलझा जाओ,

प्रभु ख्रीस्त मेरे.....

ये मन तुम बिन अब प्यासा है,

राह तकते नयन सुलग़ते है,

तुम तृप्त करो जीवन जल से,

और मन की प्यास बुझा जाओ,

प्रभु ख्रीस्त मेरे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।