बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव

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॥ पावन पाठ ॥

बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में...-3

इस काया में घोर अंधेरा सुन लो जी गुरुदेव,

ज्योति ज्ञान की जला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में..

बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में...

इस काया में कूड़ा कचरा सुन लो जी गुरुदेव,

झाड़ू ज्ञान की लगा दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में..

बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में...

इस काया में मैल बहुत है सुन लो जी गुरुदेव,

साबुन ज्ञान का लगा दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में..

बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में...

इस काया में पाप बहुत है सुन लो जी गुरुदेव,

गंगा ज्ञान की बहा दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में..

बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में...

इस काया का मोल नहीं है सुन लो जी गुरुदेव,

काया मिट्टी में मिल जाए गुरुदेव ,

दर्द मेरी नस नस में..

बूटी ज्ञान की पिला दो गुरुदेव,

दर्द मेरी नस नस में...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।