गरुड़ के रथ पे बैठकर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गरुड़ के रथ पे बैठकर मेरे घर आए श्री भगवान,

बहन कुछ समझ ना पाई सासुल को लाई रे बुलाए,

सांस मेरी पूछन लागी किस विध आए श्री भगवान,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

धर्म की माता समझी सेवा करी थी दिन और रात,

बरत ग्यारस की करे थे, मिलने को आए श्री भगवान,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

बहुरि तु फलियो फूल्यो, मुझको भी मिल गए श्री भगवान,

सास हरि पैरों में पड़ गई, मुझको भी देना कुछ ज्ञान,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

ज्ञान तेरी बहू देगी जिसके हृदय में श्री भगवान,

बहु कुछ ज्ञान बतइओ, कट जा बुढ़ापा मेरा आज,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

सास कभी झूठ ना बोलो मिल जाएंगे तुमको श्री भगवान,

सांस मेरी जल्दी उठ कर दो घड़ी लेना हर का नाम,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

सास चाहे जितना हो जाए कभी ना करियो तू गुमान,

सास पतिव्रता रहना पति में ही देखो श्री भगवान,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

बात एक याद रखना जाना पड़ेगा श्मशान,

ग्यारस के व्रत करण से मिल जाएं मुक्ति का धाम,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

सास सत्संग में जइयो करके तू घर का सारा काम,

दो घड़ी भजन सुनाइए काया को मिल जाएगा आराम,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

सास वहां अमृत बरसे काया के कट जाए रोग तमाम,

सास सत्संग में जाना वहीं पर मिलेंगे श्री भगवान,

गरुड़ के रथ पे बैठकर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।