मेरा हाथ पकड़ ले रे कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा हाथ पकड़ ले रे,

कान्हा दिल मेरा घबराये,

काले काले बादल,

गम के बादल,

सिर पे मेरे मंडराये,

मेरा हाथ पकड़ लें रे,

कान्हा दिल मेरा घबराये।।

अगर मेरे वश में,

होता कन्हैया,

तो पार लगाता मैं,

खुद अपनी नैया,

यहाँ वहाँ रखूं,

जहाँ जहाँ रखूं,

पाँव फिसलता जाये,

मेरा हाथ पकड़ लें रे,

कान्हा दिल मेरा घबराये।।

अगर आना है तो,

आजा कन्हैया,

पार लगा जा,

बन के खिवैया,

धीरे धीरे करके,

थोड़ा थोड़ा करके,

वक्त गुजरता जाये रे,

मेरा हाथ पकड़ लें रे,

कान्हा दिल मेरा घबराये।।

नहीं आना हो तो,

खबर भेजे देंना,

हालत उठाकर,

नज़र देख लेना,

कही ऐसा ना हो,

तेरे भरोसे,

‘बनवारी’ रह जाये रे,

मेरा हाथ पकड़ ले रे,

कान्हा दिल मेरा घबराये,

काले काले बादल,

गम के बादल,

सिर पे मेरे मंडराये रे,

मेरा हाथ पकड़ लें रे,

कान्हा दिल मेरा घबराये।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।