आओ मेरी शेरावाली माँ

अनुराधा पौडवाल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आओ मेरी शेरावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी शेरावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी ज्योतावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ

मेरी सोये भाग्य जगा दो,

ओ मैया मेरी जगदम्बे,

मेरी बिगड़ी आप बना दो,

ओ मैया मेरी जगदम्बे॥

जय माँ जय माँ जय जय माँ,

जय माँ जय माँ जय जय माँ,

हो सुन के महिमा तेरी निराली,

आया दर पे एक सवाली,

वो दुखियारा जन्म से अँधा,

हाल बड़ा था उसका मंदा,

तड़प के बोला आँखों के बिन,

पत्थर है हीरे मोती,

नैना देवी माता है तू,

दे दे रे नैनो को ज्योति,

तेरी दया से मिट गया

उसकी आँखों से अँधियारा माँ,

आओ मेरी नैना देवी माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी नैना देवी माँ,

ओ माँ ओ माँ.....

हो… एक दिन एक अभागन नारी,

कहने लगी दुखड़ा अपना,

माँ तेरे भक्तो को देखो,

कितना दर्द पड़े सहना,

तूने तो कितनी माओं को,

बक्शे आँखों के तारे,

दया करो इतनी की,

मुझको कोई माँ कह के पुकारे,

दया हुई जब तेरी मैया,

उसकी गोद भरी खाली,

आओ मेरी जगजननी माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी जगजननी माँ,

ओ माँ ओ माँ....

जय माँ जय माँ जय जय माँ,

जय माँ जय माँ जय जय माँ,

हर जीवन की हे जग दाती,

नैया पार लगाती तू,

भटक गए जो राह मुसाफिर,

उनको राह दिखाती तू,

हम भी आये द्वार पे तेरे,

माँ अपना दुःखड़ा कहने,

तेरे होते क्यों बच्चों को,

इतने दर्द पड़े सहने,

भर दो मेरी झोली खाली

दया करो माँ अम्बे रानी

आओ मेरी मेहरावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी मेहरावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी शेरावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ,

आओ मेरी ज्योतावाली माँ,

ओ माँ ओ माँ

मेरी सोये भाग्य जगा दो,

ओ मैया मेरी जगदम्बे,

मेरी बिगड़ी आप बना दो,

ओ मैया मेरी जगदम्बे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।