दिल का दरवाजा खुला हुआ

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॥ पावन पाठ ॥

दिल का दरवाजा खुला हुआ,

हमारे दिल में आओ प्रभु,

कोई तुझसा देखा ना कही,

सच है यह मेरे यीशु॥

तेरे दर्शन से सुख मिले,

तेरे करम से दिया जले,

तेरी ये जमी ये आसमान,

सब का है तु मेहरबान,

दिल का दरवाजा खुला हुआ,

हमारे दिल में आओ प्रभु,

कोई तुझसा देखा ना कही,

सच है यह मेरे यीशु॥

तेरी ही दया से चले जहाँ,

तेरा नजारा कहाँ कहाँ,

तेरी ही अमानत ये जिन्दगी,

दिये जहा में ख़ुशी-ख़ुशी,

दिल का दरवाजा खुला हुआ,

हमारे दिल में आओ प्रभु,

कोई तुझसा देखा ना कही,

सच है यह मेरे यीशु॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।