जग घूमेया थारे जैसा न कोई

पारंपरिक
हनुमान जी कथा हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ना वो रामभक्ति कहीं

ना वो रामदीवाना कहीं

कहीं राममय बातें भी ना

ना वो रामकहानी कहीं

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

ना तो लाल लाल चोला कहीं

ना तो संकट मोचन कहीं

ना वो वीर कथाएँ देखीं

ना वो लंका जलाना कहीं

जैसा तू है वैसा रहना

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

रामजी के चर्नो की माटी है निराली तू

शिवजी की रुद्ररूपी शक्ति बलशाली तू

भक्तों का ढाल भी है

दुश्टों का काल है

रामजी के कामों को

पल मे संभाले तू

ना वो पर्वत उठाना कहीं

ना वो लखन जिलाना कहीं

कभी रामजी के रंग मे

सिन्दूर लगाना कहीं

जैसा तू है वैसा रहना

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

सबकी मुसीबतों में

सबकी पुकार में

सुख और दुख वाले

सारे हालातों में

साथ तेरे रहना है

साथ तेरे रहना है

तेरे साथ रहना

दीपक को तो बस

आए ये कहना

तेरी मिलती भक्ति यहीं

तेरी मिलती शक्ति यहीं

तेरे चरणो की धूलि से

तक़दीर संवरती यहीं

वहीं मिलता जो है कहना

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

जग घूमेया थारे जैसा ना कोई

– कुंवर दीपक (8700018045)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।