मेरे मन हरि का ध्यान लगा

-- स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन हरि का ध्यान लगा,

क्यूँ उलझे तू व्यर्थ जगत में, उसका ही बन जा,

मेरे मन हरि का ध्यान लगा॥

हरि तेरा ही सच्चा साथी,

सुमिरन कर ले तू दिन राती,

सुमिरन में खो जा...

मेरे मन हरि का ध्यान लगा॥

छोड़ दे चिंता तोड़ दे बंधन,

हरि चरणों में कर दे समर्पण,

अब ना देर लगा...

मेरे मन हरि का ध्यान लगा॥

सुमिरन कर ले श्वांस श्वांस में,

हर पल प्रभु है तेरे पास में,

ऐसा भाव बना...

मेरे मन हरि का ध्यान लगा॥

देख लिया सब जग का बनके,

टूटे कितने संजोए सपने

हरि किंकर बन जा...

मेरे मन हरि का ध्यान लगा॥

रचना--- स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज

संगीत व स्वर--- Rajkumar Bhardwaj

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।