ऐ फकीर लोको बड़े पीर हुंदे ने

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ऐ फकीर लोको बड़े पीर हुंदे ने,

ऐ फकीर हुंदे ने शाही पीर हुंदे ने,

ऐ फकीर लोको बड़े पीर हुंदे ने॥

ऐ ता जीथे चरण छूआंदे,

ओथे तीर्थ ही बन जांदे,

ऐ फकीर रब दे वजीर हुंदे ने,

ऐ फकीर हुंदे ने शाही पीर हुंदे ने,

ऐ फकीर लोको बड़े पीर हुंदे ने॥

मुखो बोल जेडे फरमांदे,

ओ ता कदी वी टल ना पांदे,

वचन संता दे पत्थर दी लकीर हुंदे ने,

ऐ फकीर हुंदे ने शाही पीर हुंदे ने,

ऐ फकीर लोको बड़े पीर हुंदे ने॥

श्रद्धा प्रेम नाल जो आंदे,

ओ अनमोल खजाने पांदे,

ऐ फकीर भगता दी तकदीर हुंदे ने,

ऐ फकीर हुंदे ने शाही पीर हुंदे ने,

ऐ फकीर लोको बड़े पीर हुंदे ने॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।