रोम रोम तेरा नाम पुकारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( रोम रोम तेरा नाम पुकारे,

एक हुए दिन, रैन हमारे,

हमसे हम ही छिन गए हैं,

जब से देखे नैन तिहारे,

कृष्णा..... )

तेरी काली अंखियों के दर्शन पाके,

धड़कन से तेज दौडू सपनों से आगे,

अब जान मिट जाए, ये जहां छूट जाए,

संग प्रेम रहे, मैं रहूं ना रहूं,

कृष्णा,,,, हरे कृष्णा,,,

दिन रैन कहूं, नहीं चैन करूं,

कृष्णा,,,, हरे कृष्णा,,,,

मोहना... आस लेके दर पे खड़े,

सांवरा... दर्शन की प्यास बढ़े,

ऐसी मस्ती है छाई.. तुझे नमन करूं,

सुध बुध बिसराई... तेरा ध्यान धरूं,

ऐसी मस्ती है छाई.. सुध बुध बिसराई,

मेरा तन मन अंग सब बोले,

अब जान मिट जाए, ये जहां छूट जाए,

संग प्रेम रहे, मैं रहूं ना रहूं,

कृष्णा,,,, हरे कृष्णा,,,

दिन रैन कहूं, नहीं चैन करूं,

कृष्णा,,,, हरे कृष्णा,,,,

मोहना.. तुझमें जो दिल खो गया,

सांवरा... मुझे तेरा दर मिल गया,

दर छोड़ ना जाऊं.. तुझे नमन करूं,

कहीं और ना जाऊं, तुझे नमन करूं,

दर छोड़ ना जाऊं.. कहीं और ना जाऊं,

मेरी डोर है तेरे हवाले,

अब जान मिट जाए, ये जहां छूट जाए,

संग प्रेम रहे, मैं रहूं ना रहूं,

कृष्णा,,,, हरे कृष्णा,,,

दिन रैन कहूं, नहीं चैन करूं,

कृष्णा,,,, हरे कृष्णा,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।