बंसी वाले मेरे नैनों में आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधाजी के प्यारे श्रीजी के प्यारे,

बंसी वाले मेरे नैनों में आजा,

मैं दोनों आंखें बंद कर दूं,

तू जो सपनों में आए श्याम मेरे,

मैं सारा जीवन सोता ही रहूं।

राधा रानी दयालु प्यारी प्यारी हैं,

बेदर्दी कठोर गिरधारी हैं,

ना मानोगे तो राधा जी के दर पे,

मुकदमा तैयार कर दूं।

छुपने में मजा क्या तुम्हें आता है,

तेरा खेल हमें यही नहीं भाता है,

आओ खुद ही उठा लो ये पर्दा,

मैं आंखें दो दो चार कर लूं।

आस तूने जो हमसे लगाई है,

फिर माया क्यों पीछे लगाई है,

बांह पकड़ो जो मेरी कन्हैया,

तो चरणों में धाम कर दूं।

अपने भक्तों को दर्शन दिखाते हो,

हाय हमको क्यों इतना सताते हो,

रस आए जो रुलाने में तुमको,

तो रसिया में रोता ही रहूं।

तूने पापी जो इतने उबारे हैं,

वही सेवक पुराने तुम्हारे हैं,

मुझे तारो जो कान्हा कृपालु,

तो सच्ची कृपा इस को कहूं।

माखन मिश्री खाए हैं तूने कितनी बार,

खाओ पिज्जा समोसा मसालेदार,

तू है भाव भगत का भूखा,

तू खाए मैं खिलाता ही रहूं।

आ जाने से क्या तेरा घट जाएगा,

मेरे कर्मों का लेखा फट जाएगा,

तेरे दर से न जाऊंगा खाली,

इरादा मेरा साफ कर दूं।

आनंद ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है,

तेरा रूपया क्या हम पे बकाया है,

दूर कर लो जो शिकवा सांवरिया,

तो झगड़ा खतम कर दूं,

बंसी वाले मेरे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।