पाप क्षमा कर जीवन दे दे

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी आराधना करूँ,

तेरी आराधना करूँ,

पाप क्षमा कर, जीवन दे दे,

दया की याचना करूँ,

तेरी आराधना करूँ।

तू ही महान, सर्वशक्तिमान,

तू ही हैं मेरे जीवन का संगीत,

हृदय के तार, छेड़े झनकार,

तेरी आराधना है मधुर गीत,

जीवन से मेरे तू महिमा पाये,

एक ही कामना करूँ,

पाप क्षमा कर, जीवन दे दे,

दया की याचना करूँ,

तेरी आराधना करूँ।

सृष्टि के हर एक कण कण में,

छाया है तेरी ही महिमा का राज,

पक्षी भी करते हैं तेरी प्रशंसा,

हर पल सुनाते हैं आनंद का राग,

मेरी भी भक्ति तुझे ग्रहण हो,

हृदय से प्रार्थना करूँ,

पाप क्षमा कर, जीवन दे दे,

दया की याचना करूँ,

तेरी आराधना करूँ।

पतित जीवन में ज्योति जला दे,

तुझ ही से लगी है आशा मेरी,

पापमय तन को दूर हटा दे,

पूर्ण हो अभिलाषा मेरी,

जीवन के कठिन दुखी क्षणों का,

दृढ़ता से समाना करूँ,

पाप क्षमा कर, जीवन दे दे,

दया की याचना करूँ,

तेरी आराधना करूँ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।