प्रभु तेरा प्यार सागर से भी गहरा

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु तेरा प्यार सागर से भी गहरा,

तू है महान आसमानों से भी ऊँचा,

तेरे विचार सागर की रेत से ज्यादा,

प्रभु तेरा दिल सृष्टि से भी है बड़ा॥

प्रभु मैं तुझसे प्यार करूँ,

प्रभु मैं तुझसे प्यार करूँ,

तेरी आराधना मैं करूँ,

आराधना....

प्रभु तू ही है महान,

तू है महान..

सिर्फ तू और कोई नहीं॥

प्रभु तेरा प्यार सागर से भी गहरा,

तू है महान आसमानों से भी ऊँचा,

तेरे विचार सागर की रेत से ज्यादा,

प्रभु तेरा दिल सृष्टि से भी है बड़ा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।