हमरे गजानन को आ गई निंदिया

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

हमरे गजानन को आ गई निंदिया,

कैसे मैं घोटू पिया तेरी भंगिया॥

सांझ मैंने घोटी सुबह मैंने घोटी,

सारा दिन घोटी पिया तेरी भंगिया,

हमरे गजानन को आ गई निंदिया,

कैसे मैं घोटू पिया तेरी भंगिया॥

हमरो ललन तो है प्राणों से प्यारो,

गोदी से उतारू तो भाग जाएगी निंदिया,

हमरे गजानन को आ गई निंदिया,

कैसे मैं घोटू पिया तेरी भंगिया॥

शंकर हंसे गोरा मुस्कावे,

अपने ललन को सुला ले ओ मैया,

हमरे गजानन को आ गई निंदिया,

कैसे मैं घोटू पिया तेरी भंगिया॥

तेरा गजानन है जग से निराला,

सबसे पहले पूजे इसे सारी दुनिया,

हमरे गजानन को आ गई निंदिया,

कैसे मैं घोटू पिया तेरी भंगिया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।