दातेया तेरा शुकर मनावा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दातेया दातेया.. तेरा शुकर मनावा मैं,

ओ सोहनिया तेरा शुकर मनावा मैं॥

यादा तेरियां औंदीया मैनु,

हर पल हर दम सिमरा तैनू,

दातेया मालका, दातेया मालका, तेरा शुकर मनावा मैं,

ओ सोहनिया तेरा शुकर मनावा मैं॥

अख खुले ता वेखा तैनू,

भगती विच दाता रम ले मैनु,

दातेया मालका, दातेया मालका, तेरा शुकर मनावा मैं,

ओ सोहनिया तेरा शुकर मनावा मैं॥

दुःख विच सिमरन सुख विच शुकराना,

सब संगत दा मान वधाना,

दातेया मालका, दातेया मालका, तेरा शुकर मनावा मैं,

ओ सोहनिया तेरा शुकर मनावा मैं॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।