दुल्हनिया बन जाऊंगी भोले की रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दुल्हनिया बन जाऊंगी भोले की रे.....-3

सखी री मैं समझा रही तोहे

अरे अब कछु ना दिखे मोहै,

दीवानी बन जाऊंगी भोले की रे,

दुल्हनिया बन जाऊंगी भोले की रे.....

मेरे तो शिव भोले भंडारी,

पूज रही उनको तो दुनिया सारी,

दीवानी बन जाऊंगी भोले की रे,

दुल्हनिया बन जाऊंगी भोले की रे.....

हिमाचल राजा की बेटी रे,

कर्म की बिल्कुल ना हेटी रे,

मैं भंगिया घोटूगी भोले की रे,

दुल्हनिया बन जाऊंगी भोले की रे.....

भजन मैं कर रही दिन और रात,

भमरिया पड़ जाए भोले साथ,

मैं रानी बन जाऊंगी भोले की रे,

दुल्हनिया बन जाऊंगी भोले की रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।