चारे पासे रंग बरसावे

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॥ पावन पाठ ॥

चारे पासे रंग बरसावे, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती,

वखरा सरूर चढ़ावे प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती,

चारे पासे रंग बरसावे, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती॥

नूरो नूर खिल जावे बाग साडे दिल दा,

चरणा च आके तेरे, बड़ा सुख मिलदा,

खुशियां खजाने झोली पावे, दाताजी तेरे नाम वाली मस्ती,

चारे पासे रंग बरसावे, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती॥

दर्शन पाके जदो गुरु महाराज दा,

मिलदा सकून साडे दिल नू आज ता,

दुनिया च नाम वधावें, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती,

चारे पासे रंग बरसावे, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती॥

मेहर तेरी पांदे ने दीदार तेरा पांदे ने,

तेरया रंगा च रंग मस्ती मनोदे ने,

सारे जीवन जयकारे लावे, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती,

चारे पासे रंग बरसावे, प्रभु जी तेरे नाम वाली मस्ती॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।