मैनू रंग दे प्रभु जी रंग दे

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॥ पावन पाठ ॥

मैनू रंग दे प्रभु जी रंग दे,

मैनू अपनेया रंगा विच रंग दे,

मैं वी मंगा तेरा प्यार प्रभु जी,

जिने लोक हजारा मंगदे,

मैनू रंग दे प्रभु जी रंग दे,

मैनू अपनेया रंगा विच रंग दे॥

रंगया ध्यानु भगत तू प्यारा,

दिता अपना आन सहारा,

जिहड़े रख दे श्रृधा पूरी प्रभु जी,

ओह ते मंगदे प्रभु विना संग दे

मैनू रंग दे प्रभु जी रंग दे,

मैनू अपनेया रंगा विच रंग दे॥

दिता दर्शन तुसी संगता नू,

कित्ता पूरी दिल दी आसा नू,

भर दीती झोली प्यारे प्रभु ने,

मंग बैठा मैं नाल प्रभु ढंग दे,

मैनू रंग दे प्रभु जी रंग दे,

मैनू अपनेया रंगा विच रंग दे॥

दासा तेरे दर ते आउंदा,

तेरी महिमा नू वो गोंउंदा,

इक पान ‌लई, तेरा दीदार प्रभु जी,

लक्खा लाइना च लगदे,

मैनू रंग दे प्रभु जी रंग दे,

मैनू अपनेया रंगा विच रंग दे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।