रहमता ने तेरिया

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॥ पावन पाठ ॥

रहमता ने तेरिया सब रहमता ने तेरियां,

भर गइयाँ झोलियाँ खाली सी जो मेरियाँ,

रहमता ने तेरिया सब रहमता ने तेरियां॥

मेरे उते दाता जदो वेला माड़ा आया सी,

किसे वी ना दाता मैनु गल नाल लाया सी,

उस वेले अखा मेतो सबने है फेरियां,

मेरे उत्ते दातिया रहमता ने तेरिया॥

भुखिया नु दाता तू रज के रजाया सी,

गलियां च रुल्दे नु बादशाह बनाया सी,

पूरियां उमंगा होइया दिल च सी जेहड़ियाँ,

मेरे उत्ते दातिया रहमता ने तेरिया॥

कसर ना छड्डी कोई भर दिते खजाने तू,

दास हो जाए सारे तेरे दीवाने आ,

भर गियां झोलियाँ खाली सी जो मेरियाँ,

मेरे उत्ते दातिया रहमता ने तेरिया॥

रहमता ने तेरिया सब रहमता ने तेरियां,

भर गइयाँ झोलियाँ खाली सी जो मेरियाँ,

रहमता ने तेरिया सब रहमता ने तेरियां॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।