गूंगा बोले रे मईया तेरे दरबार में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गूंगा बोले रे मईया तेरे दरबार में,

गूंगा बोले रे, गूंगा बोले रे,

गूंगा बोले रे मईया तेरे दरबार में।।

अरे मईया है वरदानी, करती मेहरबानी,

ओ लंगड़ा चल के आये देखो, गूंगा बोले जुबानी,

भर देती खुशियों से झोली, इसकी अजब कहानी,

इसके दर पे झुका गए सर देखो अकबर से अभिमानी,

अमृत घोले रे, मईया तेरे दरबार में,

गूंगा बोले रे मईया तेरे दरबार में।।

वो चाहे तो बना दे राजा, वो चाहे तो भिखारी,

उनकी महिमा गाती है ये देखो दुनिया सारीं,

दर्शन देती है महामाया, करके शेर सवारी,

ऊँचे पर्वत बैठी माता भक्तों को है प्यारी,

मनवा ढोले रे, मईया तेरे दरबार में,

गूंगा बोले रे मईया तेरे दरबार में।।

भक्तों जिन पर माता जी की एक नज़र पड़ जाए,

वो दीवाना माँ अम्बे की नज़रों में चढ़ जाए,

दर्शन पाके दुनिया भूले, मईया के गुण गाये,

अरे खाली झोली लेके आये, झोली भर ले जाए,

दीवाना बोले रे, मईया तेरे दरबार में,

गूंगा बोले रे मईया तेरे दरबार में।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।