कसम रब दी ना रह पावां

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॥ पावन पाठ ॥

कसम रब दी ना रह पावां तेरे दीदार तों बिना......-4

मेरे दिल दा वेहड़ा सुन्ना ए, मेरे यार तो बिना,

कसम रब दी ना रह पावां तेरे दीदार तों बिना।।

ओ गल समझ ना पैंदी मेरे अकलां वालेया दी,

दिल दिया कौन पछाने, इक दिलदार तो बिना,

कसम रब दी ना रह पावां तेरे दीदार तों बिना।।

आँखा तो लेके दिल तक जांदिया रावां तेरिया ने,

कोई होर नहीं आ सकदा, इक हकदार तो बिना,

कसम रब दी ना रह पावां तेरे दीदार तों बिना।।

ओ सिर दा ताज बनाले, भावे जोड़ा पैरा दा,

कुंडे टूट गए जलिबा दे,

माईआ तैनू कसम लगे, हाल सुन लै गरीबा दे......

कोई टानी तनी होई ए,

छड्ड के ना जा माईआ, वावां रौनक बनी होई ए.....

ओ सिर दा ताज बनाले, भावे जोड़ा पैरा दा,

गुलामा दी की मर्ज़ी, मेरे सरदार तो बिना,

कसम रब दी ना रह पावां तेरे दीदार तों बिना,

मेरे दिल दा वेहड़ा सुन्ना ए, मेरे यार तो बिना,

कसम रब दी ना रह पावां तेरे दीदार तों बिना.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।