मेरी मईया के भवन में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मईया के भवन में कैसी छा रही अजब बहार,

छा रही अजब बहार ओ कैसी छा रही अजब बहार,

मेरी मईया के भवन में कैसी छा रही अजब बहार।।

अपना चंडी रूप बनाओ, चण्ड मुंड मार गिराओ,

शुंभ निशुंभ विनाशक माँ तेरे गल मुंडल को हार,

मेरी मईया के भवन में कैसी छा रही अजब बहार।।

ब्रह्मा विष्णु महेश मनावे,

ये तीनो तेरे गुण गावे,

‘हरी ॐ’ को आज बुलाले,

मोहे दर्शन देयो इक बार,

मेरी मईया के भवन में कैसी छा रही अजब बहार।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।