तूने ओ बाबोसा कैसा जादू किया

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तूने ओ रंगीले कैसा जादू

तूने ओ बाबोसा कैसा जादू किया,

तुझ बिन लागे नही मेरा जिया,

दर पे बुलाके, जो प्यार दिया, तेरा शुक्रिया,

हो... तूने ओ बाबोसा कैसा जादू किया....

अपना बनाके, चरणों मे बिठाके,

मेरी तो बदल डाली दुनिया,

हम है तुम्हारे, तुम हो हमारे,

तूने ही दी मुझे खुशिया,

सोचा ना कभी तूने वो दे दिया, तेरा शुक्रिया,

हो... तूने ओ बाबोसा कैसा जादू किया....

मेरा ये तन मन, दिलबर ये जीवन,

अब तेरे ही हवाले,

प्राची ये बंधन तुमसे है बांधा,

श्री बाबोसा चुरू वाले,

भक्तो का जीवन संवार दिया, तेरा शुक्रिया,

हो... तूने ओ बाबोसा कैसा जादू किया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।