लेने आजा हारावाले आनंदपुर के मोड़ पे

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॥ पावन पाठ ॥

आ गया मैं दुनियादारी, सारी दाता छोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे॥

हार गया मैं इस दुनिया से, अब तो दाता थाम ले,

कहां मुझे तेरे ही भगत ने दाता का तू नाम ले,

अपने पराए छोड़ गए सब दिल मेरा ये तोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे,

आ गया मैं दुनियादारी, सारी दाता छोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे॥

भक्तों को तू दाता आके दर्शन अपना दिखा दे तू,

जैसे दर्शन सबको देता वैसे मुझे करा दे तू,

अब मैं खड़ा हूं द्वार तुम्हारे दोनों हाथ जोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे,

आ गया मैं दुनियादारी, सारी दाता छोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे॥

मैं ना जानू पूजा अर्चन, तुझको अपना मान लिया,

तू ही दौलत तू ही शोहरत, इतना दाता जान लिया,

अपना बना ले इस आनंद को, दिल को दिल से जोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे,

आ गया मैं दुनियादारी, सारी दाता छोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे॥

मुझको है विश्वास मुझे तू एक दिन दाता तारेगा,

तुझ पे भरोसा करने वाला जग में कभी ना हारेगा,

जिन पे किया भरोसा मैंने छोड़ गए वो रोड़ पे,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे,

आ गया मैं दुनियादारी, सारी दाता छोड़ के,

लेने आ जा हारावाले, आनंदपुर के मोड़ पे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।