शेरावाली ओ मेरी मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली ओ मेरी मैया,

ज्योतावाली ओ मेरी मैया,

लाटावाली ओ मेरी मैया,

मेहरावाली ओ मेरी मैया,

मैया मेरी मैया शेरावाली,

मैया मेरी मैया ज्योतावाली,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

मैया मेरी मैया शेरावाली,

मैया मेरी मैया ज्योतावाली......

तू ही तो जनम देती पालन भी करे तू ही,

सुख देके हमे मैया गम सारे हरे तू ही,

हर पल ही छलकता है बस प्यार निगाहो से,

खुशहाल है माँ हम सब बस तेरी दुआओ से,

आ पाये तेरे दर पे माँ तेरी इजाज़त से,

इंसाफ लिये लौटे सब तेरी अदालत से,

अंजना सफर तय हम जीवन का ये कर पाये,

संसार के सागर से हम पार उतर जाये,

हे अम्बे भवानी माँ भक्तो पे करम कर ले,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

मैया मेरी मैया मेहरावाली,

मैया मेरी मैया लाटावाली......

उपकार तेरे मैया हम कैसे भुला पाये,

कर्ज़ा जो तेरा हमपर वो हम ना चूका पाये,

तू प्यार की मूरत है ममता का खज़ाना है,

कदमो में तेरे मैया सर हमको झुकाना है,

जो आये यहाँ उनकी तक़दीर सवरती है,

खुशियो से भरी आभा चेहरो पे निखरती है,

दुष्टो को मिटाती है भक्तो को बचाती है,

भटके हुए लोगो को तू राह दिखाती है,

वरदान से माँ जग की नफरत को ख़तम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

मैया ओ मेरी मैया शेरावाली,

मैया मेरी मैया लाटावाली....

तूने कई माँगो का सिन्दूर बचाया है,

ममता भरी आँखों ने रोतो को हसाया है,

कइयो की भरी गोदे बिछडो को मिलाया है,

अंधो को मिली आँखें लंगड़ो को चलाया है,

हर जीव को तू मैया गोदी में खिलाती है,

भूखा तू जगाती पर भूखा ना सुलाती है,

करुणामयी माता की महिमा ही निराली है,

मन में तेरी भक्ति की अब ज्योत जगा ली है,

मोह माया भरे दिन से मेरे दूर भरम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

आये है तेरे दर पे इतना तू रहम कर दे,

मैया ओ मेरी मैया शेरावाली,

मैया मेरी मैया ज्योतावाली,

मैया मेरी मैया मेहरावाली,

मैया मेरी मैया लाटावाली,

शेरावाली ओ मेरी मैया,

ज्योतावाली ओ मेरी मैया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।