सतगुरु चरणा कोलो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु चरणा कोलो,

कदे दूर हटावी ना,

तू मैंनू विसर जावे,

ऐसा दिन आवे ना,

सतगुरु चरणा कोलो,

कदे दूर हटावी ना॥

कर्मा विच लिखदे तू,

साडा मिलना जुलना,

आके दर तेरे ते,

मस्तक अपना धरणा,

तू साडीयाँ भुल्लां नु,

कदे चेते लावी ना,

तू मैनु विसर जावे,

ऐसा दिन आवे ना,

सतगुरु चरणा कोलो......

मतलब दी दुनिया ऐ,

जग एक तमाशा ऐ,

गल हो जावे हल तां,

सबने छड जाना ऐ

हुन सानू छड के दाता,

कदे दूर तू जावी ना

तू मैनु विसर जावे,

ऐसा दिन आवे ना,

सतगुरु चरणा कोलो......

सुख दुख सब तेरे ने,

कुछ वी नई मेरा ऐ

मेरे विच कुझ मेरा नई,

दाता सब तेरा ऐ,

सुन अर्ज मेरी फ़रियदा,

कदे दुख विच पावी ना

तू मैंनु विसर जावे ,

ऐसा दिन आवे ना,

सतगुरु चरणा कोलो......

ॐ नमः शिवाय, शिवजी सदा सहाय,

ॐ नमः शिवाय, गुरुजी सदा सहाय ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।