बस चार दिनों का मेला

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बस चार दिनों का मेला,

फिर चला चली खेला,

नही कायम जग में डेरा,

प्यारे ना तेरा ना मेरा।।

नो महलों की बाते छोड़ो,

धेला साथ ना जाएगा।

मुठ्ठी बांध के आया जग में,

हाथ पसारे जाएगा,

मोती माणिक हेरा,

ना सोने का ढेरा,

नही कायम जग में डेरा,

प्यारे ना तेरा ना मेरा।।

ये काया ना साथ चलेगी,

जिसपे तू इतराया,

रूप रंग है एक छलाबा,

सारी झूठी माया है,

तुझे मद माया ने घेरा,

ना राम की माला फेरा,

नही कायम जग में डेरा,

प्यारे ना तेरा ना मेरा।।

ना सत्संग ना राम भजन,

ना तीरथ ना धाम किया,

ना भूखे को रोटी ही दी,

ना कुछ उसका मान किया,

‘राजेन्द्र’ हरि का चेरा,

मैं हरि का हरि मेरा,

नही कायम जग में डेरा,

प्यारे ना तेरा ना मेरा।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।