खाटूवाले तेरी यारी रास आ गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटूवाले तेरी यारी रास आ गई,

निकल रही थी जान बाबा सांस आ गई,

मैं जब जब हारा मैंने तुझको पुकारा,

डूबा था बीच समंदर तूने लाया किनारा,

तेरी वजह से जीने का अब आस आ गई,

खाटूवाले तेरी यारी रास आ गई।

दुनिया ये मुझको बाबा कुछ ख़ास नहीं लगती,

तेरे सिवा कोई और आस नहीं लगती,

तू संग है तो रंग है वरना सब बेरंग है,

तेरे नाते चलदा मेरा ये दम है,

कृपा तेरी से हर ख़ुशी मेरे पास आ गई,

खाटूवाले तेरी यारी रास आ गई।

मैनु आदत पै गई तेरी मेरे सांवरे इस तरह,

मछली नू पाणी दी लोड है जिस तरह,

तू है धड़कन तू ही सांस तू ही मंज़िल तू ही राह,

चरणों में सदा बाबा देना तू पनाह,

रेहमत तेरी ये मोनू शर्मा के पास आ गई,

खाटूवाले तेरी यारी रास आ गई।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।