ऊबो थारी हाज़री बजाऊं बालाजी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ऊबो थारी हाज़री,

बजाऊं बालाजी,

बोल कुण सा भजन,

सुनाऊँ बालाजी,

बोल कुणसी सेवा,

निभाऊं बालाजी,

बोल तन्ने कीकर,

रिजाऊ बालाजी,

ऊबो थारी हाज़री,

बजाऊं बालाजी,

बोल कुण सा भजन,

सुनाऊँ बालाजी....

भाव भजन म्हारे,

समझ ना आवे,

भाव में तो हिवड़ो,

भर भर आवे,

बोल कितना आंसुड़ा,

बहाऊँ बालाजी,

बोल तन्ने कीकर,

रिजाऊ बालाजी,

ऊबो थारी हाज़री,

बजाऊं बालाजी,

बोल कुण सा भजन,

सुनाऊँ बालाजी....

हरष भरूँ या,

श्रृंगार मैं गाऊं,

किन विध थारां,

वारणा उतारूं,

शब्द के सिणगार,

सजाऊँ बालाजी,

बोल तन्ने कीकर,

रिजाऊ बालाजी,

ऊबो थारी हाज़री,

बजाऊं बालाजी,

बोल कुण सा भजन,

सुनाऊँ बालाजी....

तन मन धन सब तेरो है,

कुछ भी नहीं प्रभु है,

चरणां में भेंट क्या,

चढ़ाऊँ बालाजी,

बोल तन्ने कीकर,

रिजाऊ बालाजी,

ऊबो थारी हाज़री,

बजाऊं बालाजी,

बोल कुण सा भजन,

सुनाऊँ बालाजी....

मैं प्रभु सेवा थारी जानूँ,

जनम जनम उपकार यो मानूँ,

बजरंग बाला नाम बस,

गाऊं बालाजी,

बोल तन्ने कीकर,

रिजाऊ बालाजी,

ऊबो थारी हाज़री,

बजाऊं बालाजी,

बोल कुण सा भजन,

सुनाऊँ बालाजी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।