तुम अपने धर्म पर ही

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॥ पावन पाठ ॥

तुम अपने धर्म पर ही बहन सब रहा करो.....-4

करो सास ससुर की सेवा,

यह तीर्थ है सुख देवा,

तुम देख ननद को री बहन मत जला करो,

तुम अपने धर्म पर ही बहन सब रहा करो....

तुम करो पति की तावेदारी,

तुम लागू पति को प्यारी,

तुम देख पति कोरी फूल जैसे खिला करो,

तुम अपने धर्म पर ही बहन सब रहा करो....

जो करे पराई निंद्रा,

वो पापों के अधिकारी,

तुम देख किसी को भी बहन मत जला करो,

तुम अपने धर्म पर ही बहन सब रहा करो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।