रखते हिसाब नही देते तौल के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रखते हिसाब नही देते तौल के,

बाँटते खजानें शिव दिल को खोल के,

पीछे हटते दे के वरदान नहीं,

मेरे गिरिजापति सा दयावान नहीं,

कोई कैलाशपति सा दयावान नहीं......

सब पे ही दया मेरे भोले नाथ करते,

दे के वरदान, मुश्क़िल में भी फँसते,

भस्मासुर क्या तुम्हें ध्यान नहीं,

मेरे गिरिजापति सा दयावान नहीं.....

लंका सोने की दान रावण को कर दी,

झोली गंगा दे के, भागीरथ की भर दी,

भोले शिव का किस पे एहसान नहीं,

मेरे गिरिजापति सा दयावान नहीं.....

देवों में देव शिव शम्भू है निराले,

पीते ना नाथ मेरे विष के जो प्याले,

होता ये आज जहान नहीं,

मेरे गिरिजापति सा दयावान नहीं.....

राम कुमार ने गुण तेरा गाया,

रघुवंशी तेरी शरण में आया,

होने देता कभी परेशान नहीं,

मेरे गिरिजापति सा दयावान नहीं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।