साईं मस्त मलंगा मेरा

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

साईं मस्त मलंगा मेरा, साईं मस्त मलंगा ,

मन साईं रंग रंगा, साईं मस्त मलंगा ,

साईं मस्त मलंगा मेरा.....

घर घर जाकर अलख जगाए,

मन को अंदर तल्ख जगाए,

जो खुद आ कर प्यास बुजाये एसी है गंगा,

साईं मस्त मलंगा मेरा.....

मंदिर मस्जिद और गुरु द्वारे,

इक दाता के घर है सारे,

फिर काहे का झगड़ा प्यारे क्या फसाद क्या दंगा,

साईं मस्त मलंगा मेरा.....

साईं के सब से याराने,

सब के संग निभाना जाने,

सब को देता पानी दाने क्या माडा क्या चंगा,

साईं मस्त मलंगा मेरा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।