मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा,

जिधर फेरूं नज़रे उधर चाहियेगा,

मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा।

जो सारे जगत का पिता,

आसमा भी है जिससे टिका,

करे जग का पालन जो,

हर जीव जग का,

वही एक परमात्मा,

मुझको वही गिरवरधार चाहियेगा,

जिधर फेरूं नज़रे उधर चाहियेगा,

मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा।

जिसने है सब जग रचा,

खिलोने अनेको बना,

सांसो की चाबी से सबको नचाये,

वो है मदारी बड़ा,

मुझको वही मुरलीधर चाहियेगा,

जिधर फेरूं नज़रे उधर चाहियेगा,

मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा।

जिसके लिए तन धरे,

कई बार जन्मे मरे,

पाने की चाहत में आये गए हम,

पर न उसे पा सके,

मुझको वही चक्रधर चाहियेगा,

जिधर फेरूं नज़रे उधर चाहियेगा,

मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा।

जतन जितने करने पड़े,

पा के रहेंगे तुझे,

अबकी न हमसे बचोगे प्रभु तुम,

यतन चाहे जितने करो,

"राजेन्द्र" को राधावर चाहियेगा,

जिधर फेरूं नज़रे उधर चाहियेगा,

मुझे श्याम सुंदर सुघर चाहियेगा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।