बहती हैं अखियों से धार

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( कालजो धड़के मेरो,

और कुम्हलावे देह,

आँखड़ली झुर झुर बहवे,

ज्यूँ सावण रो मेह। )

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे,

आ जाओ साँवरे,

हम तो हारे हारे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे।।

नदियाँ का पानी बाबा,

चढ़ने लगा है,

दिल मेरा जोर से धड़कने लगा है,

थाम लो कन्हैया आके,

मेरी नांव रे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे,

आ जाओ साँवरे,

हम तो हारे हारे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे।।

फेर के जो तू मुंह बैठा,

बात ना बनेगी,

नाम की तुम्हारी बाबा,

साख ना बचेगी,

राख ले तू नाम की अपने,

पत साँवरे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे,

आ जाओ साँवरे,

हम तो हारे हारे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे।।

आप पे ही सांवरे,

जीवन का दारमदार है,

देर ना करो, आ जाओ,

दीन की पुकार है,

कमल का सहारा अब तो,

तू ही श्याम रे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे,

आ जाओ साँवरे,

हम तो हारे हारे,

बहती हैं अखियों से धार,

आ जाओ सांवरे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।