कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा,

कहाँ छुपे हो बताओं ना कान्हां,

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा....

जमुना किनारा तोहरे बिन सूना,

आवो बंसी बजाओ ना कान्हाँ,

कहाँ छुपे हो बताओं ना कान्हा,

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा....

ग्वाल बाल सब राह तकत हैं,

सांवरी सूरत दिखाओ ना कान्हा,

कहाँ छुपे हो बताओं ना कान्हा,

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा....

वृन्दावन में ढूंढत गोपियाँ,

आओ रास रचाओ ना कान्हा,

कहाँ छुपे हो बताओं ना कान्हा,

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा....

मात यशोदा रोवत तोहरी,

आके गले लग जाओ ना कान्हा,

कहाँ छुपे हो बताओं ना कान्हा,

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा....

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा,

कहाँ छुपे हो बताओं ना कान्हां,

कहाँ कहाँ ढूंढूं तोहे कान्हा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।